Fild

बुक्सा बैबसाइट मै सुआगत ऐ।

आज को बचन

तुम नमरता और लाड़ और सबर के संग हमेसा आपस मै पियार सै एक दूसरे की सैह लो,

इफिसिऔ 4:2

परिचै

  • बुक्सा कै बोक्सा के नाम सै बी जानो जाबै ऐ, बुक्सा इंडो-आर्यन भासा के भीतर आबै ऐ;
  • बुक्सा लोग भारत के उत्तारखंड के नैनीताल, उधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून और पौड़ी गढ़वाल जिलौं के तराई-भाबर मै और उत्तर परदेस के जिला बिजनौर मै बसे भए ऐं;
  • जिस इलाके मै बुक्से रैहबै ऐं बाकै बुक्साड़ कैबै ऐं;
  • बुक्सा लोग जो भासा बोलै ऐं बाकै बुक्साड़ी कैबै ऐं, बुक्साड़ी- नैनीताल जिला के रामनगर, और उधम सिंह नगर जिला के बाजपुर और गदरपुर इलाके मै जादा बोली जाबै ऐं।
  • बुक्सा समाज के लोग खेती-बाड़ी, डंगर और बकरी पालै ऐं, और मजदूरी करै ऐ;
  • बुक्सा समाज के लोग भोले भाले और मैहनती होवै ऐ। 
ढलईया

ढलईया

ढलईया बुक्साड़ की पैचान ऐ, जे आसान बारी, रामतोड़, तोता बारी और बी कई तरिका की होवै ऐ;   

ढलईया को इसतमाल बिहा-सादी, तौहारौ, पूजा-पाठ और घरौ मै करो जावै ऐ।

  • बिहा-सादी मै ढलईया को इस्तमाल डाली के ताँई करो जावै ऐ!
  • तौहारौ और पूजा पाठ मै ढलईया को इस्तमाल पुरी पक्बान रखनै के ताँई करो जावै ऐ!
  • घरौ मै रोटी या कछू और चीज रखनै के ताँई ढलईया को इस्तमाल करो जावै ऐ।
बुकसाड़ी सांग

सांग

संग बुक्सार को नाच ऐ जाकी खासिआ जौ ऐ कै जामै मरद बईयर के लत्ता पैहर कै नाचै ऐ, सांग खास कर कै होरी मै करो जावै ऐ।

कुठिया 002

कुठिया

कुठिया एक नाज रखनै की जगै ऐ, कुठिया मै बुक्से लोग अपने खानै के मारे धान या गैहूँ भरकै रैखै ऐं। पर आज के टैंम मै मुसकल सै कुछी गामौ के घरौ मै होगी।

ढलईया

ढलईया

चूले

चूले

Your encouragement is valuable to us

Your stories help make websites like this possible.